कलश स्थापना के साथ मां परसंडा की अराधना शुरू
गिद्धौर
के चंदेल राजवंश द्वारा उलाय नदी तट पर स्थापित ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर में कलश स्थापना के साथ नवरात्र आरंभ हो गया। नवरात्र को लेकर पुरे नेम निष्ठा के साथ रियासत के विद्धान पंडितों द्वारा कलश स्थापना कर मां दुर्गा की आराधना प्रारंभ हो गयी। इधर चंदेल रियासत के इस पौराणिक मंदिर में दंडवत देने की प्रथा के तहत उलाय नदी में स्थान कर दंडवत देने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया है। विधिवत इस मां दुर्गा मंदिर में चले आ रहे रिति रिवाजों व परंपराओं के अनुरूप नेम निष्ठा के साथ पूजा को सम्पन्न कराने से संबंधित सारी जिम्मेदारी का भार शारदीय दुर्गा पूजा सह लक्ष्मी पुजा समिति सदस्यों की है। इधर मां भगवती के प्रतिमा को मूर्त रूप देने में बनारस के सुप्रसिद्ध मूर्तिकार गिद्धौर निवासी राजकुमार रावत के द्वारा किया जा रहा है। वहीं इस ईलाके में सुविख्यात गिद्धौर के दशहरे को लेकर मेले की रौनक बढाने खेल तमाशों का लगना भी शुरू हो गया है।
-जितेंद्र कुमार, गिद्धौर(जमुई)
के चंदेल राजवंश द्वारा उलाय नदी तट पर स्थापित ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर में कलश स्थापना के साथ नवरात्र आरंभ हो गया। नवरात्र को लेकर पुरे नेम निष्ठा के साथ रियासत के विद्धान पंडितों द्वारा कलश स्थापना कर मां दुर्गा की आराधना प्रारंभ हो गयी। इधर चंदेल रियासत के इस पौराणिक मंदिर में दंडवत देने की प्रथा के तहत उलाय नदी में स्थान कर दंडवत देने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया है। विधिवत इस मां दुर्गा मंदिर में चले आ रहे रिति रिवाजों व परंपराओं के अनुरूप नेम निष्ठा के साथ पूजा को सम्पन्न कराने से संबंधित सारी जिम्मेदारी का भार शारदीय दुर्गा पूजा सह लक्ष्मी पुजा समिति सदस्यों की है। इधर मां भगवती के प्रतिमा को मूर्त रूप देने में बनारस के सुप्रसिद्ध मूर्तिकार गिद्धौर निवासी राजकुमार रावत के द्वारा किया जा रहा है। वहीं इस ईलाके में सुविख्यात गिद्धौर के दशहरे को लेकर मेले की रौनक बढाने खेल तमाशों का लगना भी शुरू हो गया है।
-जितेंद्र कुमार, गिद्धौर(जमुई)

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