उपेंद्र ने की लछुआड़ में एयरपोर्ट बनाने की मांग



जमुई के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी उपेंद्र रविदास ने प्रेस बयान जारी कर कहा है कि जमुई में एक एयरपोर्ट का होना बहुत जरूरी है, जिससे लछुआड़ में देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं सहित आमजनों को इसका लाभ मिलेगा। दरअसल यहा पर्यटन के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। जमुई जिला पुरातात्विक स्थलों, जंगलों, पहाड़ी, नदियों और घाटियों की पृष्ठ भूमि रही है। प्राप्त पुरातात्विक अवशेष इसके गौरवमय अतीत का स्मरण कराते हैं। पुरातत्व पुस्तक के अनुसार जमुई की प्राचीनता महाभारत काल से ही शुरू होती है। जैनों के 24वें तीर्थाकर भगवान महावीर का जन्म लछुआड़ के क्षत्रीय कुड में 6ठी शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ माना जाता है। जैन धर्म में भगवान महावीर का जन्म स्थली व लछुआड़ महान तीर्थस्थल माना जाता है। प्रति वर्ष यहा देश-विदेश से भक्त जूटते हैं। 9वें श्री सुविधि नाथ काकन्दी का काकन कार्यस्थल था। मान्यता के अनुसार उनके समय में यहा जैन धर्मावलम्बियों का विराट संघ हुआ करता था। जैन युग के बाद मौर्य के आगमन का भी यहा प्रमाण मंजोष के लौह की ढलाई कारखाने के रूप में मिला है। पाल वंश के भी कुछ अंश यहा मिले है जिसे आज के इन्दपै पूर्व में इंद्रप्रस्थ कहा जाता था। आज भी इंदपै में भव्य दुर्गा मंदिर अवस्थित है। रामायण में भी गिद्धकूट पर्वत का जिक्र है जो गिद्धेश्वर पहाड़ के नाम से जाना जाता है। ऐसी किदवंती है कि रावण का गिद्धराज जटायू से यहीं पर युद्ध हुआ था। इसके अलावे गिद्धेश्वर का टिल्हा, सोनो में सोना ढालने का टिल्हा आदि पुरातात्विक स्थल उपलब्ध है। इस प्रकार काकन, लछुआड़, क्षत्रीय कुंड, इन्दपै, नौलक्खा गढ़, गिद्धेश्वर का टिल्हा, बगुला मुखी मंदिर, स्वामी विवेकानंद की तपोभूमि सिमुलतला आदि कई पौराणिक गाथा के रूप में जिले में अवस्थि्त है। इसलिए मैं केंद्र और राज्य सरकार से अनुरोध करता हूँ कि जमुई में एयरपोर्ट  बनाने की स्वीकृति दी जाय।

-अभिषेक कुमार सिंह, जमुई।

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